कोरा ज्ञान-Short Motivational Story हिंदी कहानी

यह कहानी उन लोगो के लिये बहुत ही प्रेरणा दायक साबित होने वाली है जिनके पास बहुत सारा ज्ञान होता है जो अपने आप को महान ज्ञानी समझते है वैसे तो बहुत सारी Motivational Story आपने पड़ी होगी| लेकिन यह कहानी भी बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है इसे जरुर पढना चाहिये|

चम्बल पुर गाँव में एक बहतु ही विद्वान् पंडित जी रहते थे वे नित्य भगवान की पूजा करते और समय अनुसार कर्मकांड और विशिष्ट पूजाओं की विधियाँ भी अपनाते रहते थे|

पंडित जी अपने गाँव में तो प्रचलित थे जबकि दूर- दूर के गाँवो में भी अपनी अच्छी ख़ासी ख्याति अर्जित कर ली थी| दूर- दूर से लोग उनके पास अपनी समस्या लेकर आते और कई प्रकार की अलग अलग पूजा की विधियों को पंडित जी से पूछते और फिर गुरु दक्षिणा भी देते|

पंडित जी को अपना सम्मान पाने में और दक्षिणा मिलने पर बहुत खुशी होती है इसी खुशी के बीच उनके मन मस्तिष्क में अभिमान का बीज अंकुरित होने लग गया था|

वे स्वयं को दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञानी मानने लग जाते है और छोटे- मोटे साधारण मनुष्यों को डांट फटकार भी लगाने में उनको जरा भी संकोच नहीं होता था|

लेकिन एक दिन उनके साथ बहुत ही अभूत पूर्व घटना होती है पंडित जी गाँवो में कथा और पूजा करने जाते थे|

एक दिन उनको पास के गाँव में कथा करने के लिये आमंत्रित किया गया था पंडित जी को वहां जाना आवश्यक था शाम का समय था पंडित जी के गाँव (चम्बलपुर) से वह दूसरा गाँव जहाँ उनको कथा के लिये जाना था, दोनों गाँवो के बीच में एक बड़ी नदी थी और उस पर कोई बांध भी नहीं था|

दोनों गाँवो के लोग नाव के सहारे ही नदी को पार किया करते थे पंडित जी भी अपनी पोथी और सामान लेकर नदी किनारे चले जाते है वहां जाकर वे एक नाविक को आवाज लगाते है “अरे ओ नाव वाले मुझे नदी के उस पार जाना है इसलिए तुम जल्दी से अपनी नाव से मुझे नदी के उस पार पंहुचा दो|

नाविक सरल बुद्धि का मनुष्य था उसने कहा महाराज अगर आप कुछ समय प्रतीक्षा कर ले तो कुछ लोग और आ जायेंगे जिससे हमारा नदी का सफ़र भी अच्छा रहेगा और मेरा फायदा भी बढ़ जायेगा| मुझे फायदा हो जायेगा|

पंडित जी यह सुनकर तिलमिला जाते है और गुस्सा हो कर कहते है; अरे मुर्ख क्या तुझे नहीं पता की में कौन हूँ? मैं सभी शास्त्रों को जानने वाला बहुत बड़ा प्रकांड पंडित हूँ और तू मुझे इन तुच्छ लोगो के लिये विलंब करवा रहा है!

जल्दी से नाव को आगे बड़ा और मुझे नदी के उस पार उतार दे नाविक कहता है महाराज बादलो में गर्जना हो रही और चारो और घनघोर घटायें छा रही है मुझे लगता है की बहुत बड़ा तूफान आने वाला है|

पंडित जी को गुस्सा आ जाता है और कहते है की अब तू मुझे सिखायेगा की क्या होने वाला है; जल्दी से नाव आगे बड़ा|

नाव नदी में आगे बढ़ जाती है फिर पंडित जी नाव चलाने वाले से पूछते है की, क्या तूने कभी शास्त्र पढ़े है? नाविक कहता है नहीं महाराज मै तो अनपढ़ हूँ बचपन से ही नावो में ही रहा हूँ मेरी किस्मत कहाँ की बड़े-बड़े गुरुकुल में जाऊं और शिक्षा प्राप्त करता|

पंडित जी कहते है अरे मुर्ख तू जानता नहीं तूने अपने जीवन का एक चौथाई हिस्सा बर्बाद कर दिया है नाविक ने कहा ये तो सब भगवन की मर्जी है मैं इसमें क्या कर सकता हूँ|

पंडित जी कहते है- क्या तू कभी कथा या भजन में गया है? नाविक कहता है- नहीं महाराज परिवार के लिये दो रोटी की व्यवस्था करने में ही पूरा दिन गुजर जाता है हमारे भाग्य में भजन और कथा कहाँ? पंडित जी फिर कहते है की है मुर्ख तूने तो अपना आधा जीवन ही बर्बाद कर दिया और फिर नाविक को अपने शब्दों से प्रताड़ित करने लग जाते है और उसको बहुत कुछ खरी-खोटी सुना देते है कहते है की तूने तो अपना आधा जीवन ही बर्बाद कर कर दिया|

नाव बीच नदी में पहुँच जाती है

जैसे ही नाव नदी के बीच में जाती है तो तेज हवा के साथ बारिश होने लगती है जिससे नाव डगमगाने लगती है और उसमे पानी भी भरने लग जाता है नाविक पंडित जी से कहता है की पंडित जी अपनी नाव पानी में डूब सकती है तो पंडित जी घबरा जाते है|

नाविक पंडित से पूछता है की महाराज आपसे एक बात पूछ सकता हूँ क्या? पंडित ने कहा हम दुविधा में है और तुम्हे प्रश्न पूछना है; पूछो क्या पूछना है हम भी बहुत बड़े पंडित है हमारे पास तुम्हारे सभी प्रश्नों का उत्तर है जल्दी पूछो|

नाव में बहुत सारा पानी भर जाता है; नाविक कहता है की पंडित जी यह नाव डूबने वाली है इसलिये क्या आपको तैरना आता है? पंडित जी घबराकर कहते; नहीं भैया मुझे तैरना नहीं आता है| तो नाविक कहता है की पंडित जी मैंने तो अपना आधा जीवन ही ख़त्म किया है लेकिन आपका तो पूरा जीवन ही खत्म हो जायेगा|

पंडित जी घबरा जाते है और थोड़ी देर में ही नाव डूब जाती है उसके साथ दोनों भी डूब जाते है लेकिन नाविक को बचपन से ही तैराकी(तैरने) का अच्छा ज्ञान था इसलिये जैसे-तैसे करके पंडित जी को नदी से तैरकर बहार निकाल लेता है|

नाविक कहता है कि पंडित जी ऐसे कोरे ज्ञान का क्या फायदा जो अपना जीवन भी न बचा सके पंडित को आत्म ग्लानी होती है और उनका घमंड भी खत्म हो जाता है वे नाविक को धन्यवाद् देते है और कहते है की ज्ञान से बड़ा कर्म है जो कर्म करेगा वही पायेगा ज्ञान होने के बाद भी कर्म करना नहीं आता तो जीवन व्यर्थ है|

कहानी से सीख:

हमें कभी भी अपने ज्ञान पर अभिमान नहीं करना चाहिये क्योंकि असली ज्ञान वही होता है जो काम में आये ऐसा कोरा ज्ञान होने से कोई फायदा नहीं है| किसी को भी बिना जाने उसकी स्थिति पर कुछ भी गलत नहीं कहना चाहिये|

यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में जरुर बताये और ऐसी ही Short Motivational Story In Hindi पढने के लिये हमारी वेबसाइट को बुकमार्क कर लेवे और कांटेक्ट फॉर्म के द्वारा अपनी जानकारी दे सकते हो हम आपको नई-नई कहानियां भेजते रहेंगे|

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