सत्य एक दिन सामने आ ही जाता है- Best Moral Stories In Hindi –

Moral Stories In Hindi

एक गाँव में गाँव के एक बहुत ही धनि और प्रतिष्ठावान  व्यक्ति सुभान मिया ( नाम बदला हुआ है। ) रहते था।

एक दिन क्या हुआ की सुभान मिया अपने घर से खेत की और निकले खेत में जाने के कुछ समय बाद सुभान मिया को बड़ी ज़ोर की टट्टी आ गयी।

सुभान मिया ने सोचा की इस खेत में कोई तो मुझे नहीं देख रहा है।  अब क्या करूँ ? सुभान मिया ने सोचा की घर जाऊँगा तब तक तो टट्टी निकल ही जायेगी।

वह खेत में ही एक बैर के वृक्ष के निचे टट्टी करने के लिए बैठ गया।  उस बैर से हवा के कारण पक्के हुए बैर भी निचे गिर गए थे।

उस व्यक्ति ने उन बैरो को उठाया और खाना शुरु कर दिया और साथ साथ में टट्टी भी कर रहा था। उसने सोचा यहाँ कौन देख रहा है मुझे ?

उसने एक साथ दोनों कार्य किये जो की वातावरण की द्रष्टि से गलत था।

एक तो बाहर टट्टी नहीं करनी चाहिये क्योंकि वातावरण प्रदूषित होता है। दूसरा उसके साथ में वह बैर भी खा रहा था।  खाना – पखाना दोनों साथ जिससे की स्वास्थ्य को नुकसान।

जब वह खेत से घर को जा रहा था , तो रास्ते में चलते – चलते सोच रहा था की किसी ने एक साथ दोनों कार्य करते हुए देखा तो नहीं। वरना गाँव में बहुत इज्जत है हमारी सब धुल में मिल जाएगी।

उसी दिन शाम को गाँव में एक नाच गाने का कार्यक्रम रखा गया था।  गाँव के सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों को बुलाया गया था। जिसमे सुभान मिया भी थे।

सुभान मिया को सबसे आगे बिठाया गया था , क्योंकि गाँव के सबसे धनि व्यक्ति थे।

जब कार्यक्रम शरू हुआ तो कुछ देर बाद एक वैश्या नाचने के लिए मंच पर आयी।

वैश्या ने जैसे ही ठुमका लगाया सब लोग ताली बजाने लग गए।

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वैश्या ने गाना शरू किया और जैसे ही यह पंक्ति गाई की – “सुभान तेरी बतिया जान गयी राम !”

सुभान मिया के तो तोते उड़ गए। उसने सोचा अरे में तो अकेले में टट्टी किया था वहाँ कोई नहीं था तो इस वैश्या को कैसे पता चल गया।

उसने वैश्या के ऊपर नोटों की गड्डी उड़ा दी । ताकि अब वैश्या आगे कुछ न बोले।

वैश्या ने आगली पंक्ति गाई – “सुभान तेरी बतिया कह दूँगी राम !”  और ठुमका लगाया।

सुभान मिया ने सोचा की अभी तो कुछ कहा नहीं और यदि कह दिया तो पोल खुल जायेगी। उसने वैश्या को अपनी हीरे से जड़ी अंगूठी दे दी। वैश्या फिर भी न रुकी !

वैश्या ने गाया – “सुभान तेरी बतिया कह रही हूँ राम !”

सुभान मिया के तो पसीने छूटने लग गए। अब तो इज्जत ख़राब  उसने अपने ऊपर ओढ़ी हुयी साल जिसमे हीरे मोती जड़े थे बहुत कीमती थी  वैश्या की और फेंक दी। ताकि वह अब तो चुप हो जायेगी।

वैश्या ने सोचा की सुभान मिया को गीत बहुत पसंद आ रहा है। उसने और ज़ोर से ठुमका लगाया और गाने लगी – “सुभान तेरी बतिया कहने जा रही हूँ राम !” 


सुभान मिया अपनी जगह से उठे और बोले – “वैश्या की जात न तुझे अपनी इज्जत की फिकर रहती है और न ही दुसरो की इज्जत का ख़याल रखती है। ”

कब से कह रही है सुभान तेरी बतिया कह दुँगी राम।  क्या कहेगी ? कह दे।

यही कहेगी ना की सुभान मिया बैर के पेड़ के निचे टट्टी किये थे और साथ में बैर भी खाए थे यही कहेगी ना। 

वैश्या ने कहा यह बात तो मुझे पता ही नहीं थी। यह तो आपने अभी बताई।

मैं तो भगवान का भजन गा रही थी की “है ! प्रभु में तो गुणगान कर दूंगी तेरा गुणगान कर रही हूँ ”

कहानी का सार : सत्य को कितना भी छुपाने के कौशिश करो , किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाता है।

गौतम बुद्ध का प्रवचन और धैर्य – Moral Stories In HIndi

एक दिन भगवान बुद्ध को एक जगह पर प्रवचन देने के लिये जाना था| वक्त हो गया भगवान बुद्ध आये और बिना कुछ कहे है अपना प्रवचन ख़त्म कर दिया और वहां से चले गए| वहाँ पर कम से कम डेढ़ सौ श्रोता उपस्थित थे|

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अगले दिन भी ऐसा ही हुआ 100 लोग उपस्थित थे पचास कम हो गये बुद्ध आये और बिना कुछ  चले गए|

तीसरे दिन भी बुद्ध आये लेकिन सिर्फ लगभग 60 लोग ही थे इसलिये भगवान बुद्ध ने कुछ भी नहीं कहा और वहाँ से चले गये|

चौथे दिन जब भगवान बुद्ध प्रवचन देने आये तब केवल 14 लोग ही उपस्थित थे चौथे दिन भगवान बुद्ध ने प्रवचन सुनाये और वो सभी 14 लोग भगवान बुद्ध के प्रवचनों से इतने प्रभावित हुये की उन्होंने अपना घर बार छोड़ दिया और भगवान बुद्ध के साथ हो गए और उनका अनुसरण करने लग गये|

तभी उन्होंने पूछा की भगवान आपने पहले, दुसरे, और तीसरे दिन प्रवचन क्यों नहीं सुनाये जब ज्यादा लोग थे उनको भी ज्ञान प्राप्त होता|

तब बुद्ध ने उनकी जिज्ञासा को शांत करते हुये जवाब दिया की- वे सभी लोग अधीर थे उनमे धैर्य रखने का गुण नहीं था इसलिये वे एक – एक करके चले गये अगर उनमे धैर्य होता तो वे अगले दिन भी आते और प्रवचन की प्रतीक्षा करते|

बुद्ध ने कहा की- मुझे भीड़ नहीं, काम करने वाले लोग चाहिये यहाँ वही टिक सकेगा जिसमे धैर्य होगा जिसमे धैर्य नहीं था वह यहाँ से चला गया और ज्ञान से वंचित रह गया|

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