इससे आगे क्या है – Short Hindi Kahani

यह कहानी है एक साधू और लक्कड़ हारे है की इस Short Hindi Kahani में आपको जीवन की वो सीख मिलेगी जो आपने कभी अनुभव नहीं की होगी.

एक जंगल में एक लक्कड़हारा लकड़ियाँ काटने जाता है और जंगल से लकड़ियाँ काटकर बाज़ार में बेच देता है. ऐसा वह रोजाना करता जंगल से लकड़ी काट कर लाता बाज़ार में बेचता और अपना घर का खर्चा चलाता. उसी जंगल में एक पेड़ के निचे एक साधू महात्मा बैठकर ध्यान किया करते थे.

इससे आगे क्या है- Short Hindi Kahani

लक्कड़हारा साधू महात्मा को कुछ नहीं कहता था और साधू महात्मा भी लक्कड़ हारे से कुछ नहीं कहते और अपने ध्यान में मस्त रहते थे और रोजाना उस लकड़ी काटने वाले को देखते रहते थे.

एक दिन साधू ने उससे कहा वैसे तो साधू ने उससे कभी कोई बात नहीं की लेकिन उस दिन साधू ने बोला की, तुम अभी तक यहीं हो आगे नहीं बड़े लक्कड़हारे को कुछ समझ नहीं आया, तो उसने कहा- आपका ऐसा कहने का मतलब क्या है?

तो साधू ने कहा की अरे भाई मै कई दिनों से देख रहा हूँ. तुम इस जंगल में आते हो और लकड़ियाँ काटकर ले जाते हो. लेकिन कभी इससे आगे नहीं गए इससे आगे जाओ.

वहाँ तुम्हे चन्दन की लकड़ियों का जंगल मिलेगा जहाँ से तुम चन्दन की लकड़ियों को लाकर बेचोगे तो तुम्हारा मुनाफा ज्यादा होगा तुम्हारा एक बार में ही 7 दिनों का खर्चा निकल जाएगा.

लक्कड़ हारे ने सोचा यह साधू यहाँ बैठा-बैठा सिर्फ ज्ञान दे रहा है, लेकिन जहाँ तक में जानता हूँ इससे आगे कोई भी ऐसा जंगल नहीं है. जहाँ चन्दन की लकड़ियाँ हो. मेरे बाप और बाप के भी बाप भी इस जंगल से लकड़ी काटते-काटते मर गए लेकिन उन्होंने ने भी कभी इसका जिक्र नहीं किया.

लेकिन यह साधू तो कह रहा है. थोड़ी देर के लिए उसने साधू को कुछ भी जवाब नहीं दिया लेकिन कुछ देर बाद उसने सोचा की इसमें नुकसान ही क्या है क्यों न इस साधू पर विश्वास किया जाए और आगे चलकर देखा जाए.

उसने साधू को कहा की ठीक है आपने कहा है तो में एक बार जरुर आगे जाऊंगा लेकिन वहां चन्दन की लकड़ियाँ तो है न या फिर तुम मुझसे कोई मजाक कर रहे हो? साधू ने कहा तुम एक बार आगे जाओ तो सही फिर कहना मैं यहीं बैठा हूँ.

उस दिन लक्कड़ हारा जंगल के आगे जाता है तो वहां उसे एक चन्दन के वृक्षों का जंगल दिखाई देता है लक्कड़हारे की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है अब वह सोचता है की में एक दिन काम करूँगा और 7 दिन आराम करूँगा. वह उस जंगल से चंदन की लकड़ियाँ काट कर ले जाता है और उसे ऊँचे दामो में बेच देता है.

ऐसा ही बहुत दिनों तक चलता रहता है लक्कड़हारा जंगल में जाता है और साधू उसे रास्ते में ध्यान अवस्था में मिलता है. लेकिन एक दिन फिर उस साधू ने उसे रोका बोला की, तुम अभी तक यहीं हो आगे नहीं गए.

लक्कड़हारा कहता है आगे क्या है? तो साधू कहता है आगे चाँदी की खदान है तुम वहां से चाँदी लाना और बाज़ार में बेचना. अब लक्कड़ हारा भी साधू पर विश्वास करने लग गया था. तो उसने सोचा की यह साधू अभी भी सच ही बोल रहा होगा.

वह चन्दन के जंगल से भी आगे जाता है और उसे वहाँ चांदी की खदाने मिल जाती है वो बहुत खुश होता है और सोचता है आज तो लाटरी लग गयी पहले तो वह बहुत सारी चाँदी घर ले जाने की सोचता है लेकिन बाद में सोचता है की इतनी सारी चाँदी अगर किसी ने मेरे पास देख ली तो मुझ पर खतरा आ जाएगा, तो क्यों न में यहाँ से थोड़ी-थोड़ी चाँदी ले जाया करूँगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा.

अब वह वहाँ से हमेशा चांदी लेने आता है और वह साधू उसे रास्ते में मिलता है कुछ साल यूँ ही बीत गए एक दिन फिर वह साधू उसे रोकता है और कहता है. तुम अभी तक यहीं हो आगे नहीं गए. लक्कड़ हारे ने कहा आगे क्या है. साधू ने कहा आगे सोने की खदाने है.

बहुत दिनों बाद साधू को देखने पर लक्कड़हारे को साधू पर विश्वास नहीं होता लेकिन वो फिर से सोचता है इसमें नुकसान ही क्या है एक बार आगे जा कर भी देख लेता हूँ हो सकता है साधू सच बोल रहा हो और वह आगे चला जाता है.

आगे जाने पर उसे सोने की खदान मिल जाती है वह फ़िर खुश हो जाता है और वहाँ से सोना लेकर घर आ जाता है अब लक्कड़हारा काफ़ी अमीर हो चूका था लेकिन फिर भी उसने अभी तक अपने धन-दौलत का राज किसी को नहीं बताया था.

कुछ सालो तक फिर से ऐसा ही चलता है और लक्कड़हारा भी अब बहुत कम उस जंगल में आता था वह अधेड़ उम्र का हो चूका था एक दिन लक्क्ड़हारा उस जंगल में सोना लेने आता है, और फिर से वह साधु उसे वहीं मिलता है एक बार फिर साधू उसे कहता है-

तुम अभी तक यहीं हो आगे नहीं बड़े यहीं उलझ कर रह गए हो? लक्क्ड़हारे ने कहा देखो अब बहुत हुआ इससे आगे और क्या हो सकता है. साधू इससे आगे हीरे की खदाने है तुम वहाँ गए ही नहीं लक्क्ड़हारे ने सोचा हाँ यार मैं इससे आगे तो कभी गया ही नहीं उसका लालच उसे और आगे ले जाता है.

वह सोने की खदानों से आगे जाता है तो उसे हीरे की खदाने मिलती है वह हीरो को देख कर पागल सा हो जाता है ख़ुशी में उसके होश का ठिकाना नहीं रहता है, कुछ देर बात वह हीरे लेकर घर आ जाता है.

उसकी लाइफ एक दम सेट हो चुकी थी वह आलिशान घर में रहता था लक्जरी गाड़ियाँ उसके पास थी किसी चीज की उसके पास कमी नहीं थी.

ऐसे ही जिंदगी बिताने के बाद वह जंगल फिर से हीरे लेने जाता है, इतने सालों के बाद भी वह साधु उसे उसी पेड़ के नीचे बैठा दिखाई देता है, वह साधु उससे फिर कहता है अरे! तुम अभी तक यहीं हो? तुम जागोगे या नहीं या हर बार मुझे ही तुम्हे जगाना होगा।

तुम अपने मन से कभी क्यों नहीं सोचते की इससे भी आगे कुछ हो सकता है. हर बार मुझे ही क्यों बताना पड़ता है. लक्क्ड़हारा अमीर बनने के बाद थोड़ा अभिमानी हो जाता है तो वह कहता है, की देखो अब मैं बूढ़ा भी हो चूका हूँ और तुम मुझे परेशान मत करो. हीरो से भी आगे क्या हो सकता है.

अब तो तुम मुझे परेशान करने के लिए झूट बोल रहे हो साधु हँसता है और कहता है किस इतनी दौलत होने के बाद परेशान हो रहे हो. लेकिन फिर भी इससे आगे कुछ है.

लक्कड़हारा कहता है- अब हीरो से भी मूलयवान और कीमती और क्या है? साधु कहता है- इसके आगे मैं हूँ.

लक्क्ड़हारा- तुम तो यहाँ बैठे हो, फिर आगे कैसे हो सकते हो. साधु कहता है- मुर्ख व्यक्ति कभी तेरे मन में यह प्रश्न नहीं आया की, जो यह साधु यहाँ बैठा है उसने क्यों इन सभी खदानों का उपयोग नहीं किया जरूर उसके पास कोई न कोई कीमती चीज होगी तभी यह यहाँ बैठा है. यह तुमने क्यों नहीं सोचा- इतना कहकर साधु चुप हो जाता है.

लक्क्ड़हारा साधु के चरणों में गिर जाता है और कहता है की जिन्दगी में मैंने इतनी भागदौड़ की धन दौलत के पीछे लेकिन मुझे अभी भी शांति नहीं मिली मैं अभी भी संतुष्ट नहीं हुआ इसके विपिरित आप इतना सब जानते हुए भी संतुष्ट होकर यहाँ बैठे रहते हो वास्तव में जीवन यही है.

कहानी से सीख: दोस्तों इस कहानी से यह सीख मिलती है की हमें जीवन में जितना मिला है उससे संतुष्ट रहना चाहिये लेकिन इससे भी बड़ी सिख यह है की धन दौलत, हीरे मोती हामारे साथ नहीं जाने वाले वो यही रह जाते है साधू ने ऐसा नहीं है की धन नहीं कमाना चाहिये.

साधू के अनुसार धन तो कामाना चाहिये लेकिन उसके साथ ही ईश्वर के ध्यान में अपने आप को लगाना चाहिये और एक समय बाद अपने धन दौलत से और माया से अपना मोह हटाकर अपने आप में खो जाना चाहिये यही असली धन है.

ध्यान करना ही असली धन है यह आपको परम शांति की अनुभूति कराता है यही आपको सफलता की और ले जाता है. ध्यान ईश्वर का रास्ता है और ईश्वर सदा तुम्हारे साथ रहता है अगर तुम ईश्वर के साथ रहते हो. तो ध्यान कीजिये और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते जायें.

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यह Short Hindi Kahani आपको कैसी लगी कमेंट में जरुर बताये.

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